क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC)?, क्यों हो रहा है इसका विरोध, जाने फायदे/नुकसान

समग्र नागरिकों के लिए एक Uniform Civil Code क्या है, इसके लाभ और उद्देश्य के बारे में जानने का प्रयास करते हैं। संविधान में उल्लिखित स्वतंत्रता कानून ने देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून और जीवन जीने की स्वतंत्रता कानून को जानमें दिया है।

इस कानून का उद्देश्य देश के सभी धर्मों के नागरिकों के लिए एक समान रूप में कार्य करना है, और इसे “यूनिफॉर्म सिविल कोड” के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा, इसे नागरिक संहिता भी कहा जाता है, जो देश के सभी धर्म और जातियों के नागरिकों पर लागू होती है। इस कानून के अंतर्गत किसी भी धर्म, जाति या समुदाय के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता है। इस आलेख में, हम आपको “Uniform Civil Code क्या है?” से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करने का प्रयास कर रहे हैं। Read This [उत्तर प्रदेश शासनादेश 2023: UP Shasanadesh ऑनलाइन देखें और डाउनलोड करे]

यूनिफॉर्म सिविल कोड क्या है?

समान नागरिक संहिता, हिंदी में “Uniform Civil Code” के रूप में जाना जाता है, और यह कानून देश के सभी धर्मों के नागरिकों पर समान रूप से प्रभाव डालता है। इसके माध्यम से, एक समान नागरिक संहिता को पूरे देश में लागू करने का प्रयास किया जाता है, और इसका स्पष्ट उल्लेख भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के भाग 4 में किया गया है। इस अनुच्छेद में इस बारे में स्पष्ट कहा गया है कि एक सामान्य नागरिक संहिता को सुरक्षित करने का प्रयास सभी नागरिकों के लिए देश के सभी क्षेत्रों में किया जाएगा, और सरकार द्वारा विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने, उत्तराधिकारी जैसे क्षेत्रों को इस कानून के द्वारा शामिल किया गया है।

इसके माध्यम से, देश के सभी जातियों और धर्मों के नागरिकों को समानता का अधिकार प्राप्त हो सकेगा, और यह दिखाता है कि धर्म और कानून के बीच कोई संबंध नहीं है। समान नागरिक संहिता का मुख्य उद्देश्य देशभर में विभिन्न सांस्कृतिक समूहों के बीच समरसता स्थापित करना है और कमजोर समूह के खिलाफ भेदभाव को कम करना है। अनुच्छेद 44 के तहत इस कानून को राज्य की जिम्मेदारी बताया गया है, हालांकि इसके बावजूद वर्तमान समय तक यह कानून देश में लागू नहीं हुआ है, इस संदर्भ में विवाद जारी है।

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) भारत में लागू क्‍यों नहीं हो पाया 

सन् 1835 में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान पहली बार समान नागरिक कानून की विचारधारा पर गौर किया गया था। उस समय, ब्रिटिश सरकार द्वारा एक रिपोर्ट के माध्यम से यह सुझाव दिया गया था कि अपराधों, सबूतों, और ठेकों जैसे मुद्दों पर समान कानून की आवश्यकता है। इसके बाद, देश के सभी नागरिकों के लिए संविधान के अनुच्छेद 44 में समान कानून को लागू करने की चर्चा भी की गई, हालांकि इसके बावजूद वर्तमान समय तक भारत में इस कानून को लागू नहीं किया गया है।

भारत में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के अभी तक लागू नहीं होने का सबसे बड़ा कारण यह है कि भारतीय संस्कृति में विविधता है, और एक ही परिवार के सदस्य भिन्न-भिन्न रिवाजों को मानते हैं। भारत की आबादी के अनुसार, देश में हिन्दू बहुसंख्यक हैं, लेकिन उनके रीति-रिवाज विभिन्न राज्यों में अलग-अलग हैं। इसके अलावा, देश में सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई, और मुस्लिम आदि सभी धर्मों के अपने-अपने कानून हैं, इस संदर्भ में, यदि यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लागू किया जाए, तो सभी धर्मों के कानून समाप्त हो जाएंगे।

Overview of Uniform Civil Code

योजना का नामसमान नागरिक संहिता
आरम्भ की गईकेंद्र सरकार द्वारा
वर्ष2023
लाभार्थीदेश के सभी धर्म और जाति के नागरिक
आवेदन की प्रक्रियाजल्द आरंभ की जाएगी
उद्देश्यदेश के सभी नागरिको को समान अधिकार प्रदान करना
लाभदेश के सभी नागरिको को समान अधिकार प्रदान किया जाएगा
श्रेणीकेंद्रीय सरकारी योजनाएं
आधिकारिक वेबसाइटजल्द जारी की जाएगी

इस विषय में पहले भी राय ली जा चुकी है 

देश में पहले ही यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लागू करने से संबंधित चर्चा और सुनवाई की जा चुकी है। इस संदर्भ में, विधि आयोग द्वारा साल 2016 में देश के नागरिकों से UCC के बारे में राय ली गई थी। इसके बाद, आयोग ने अपनी रिपोर्ट को 2018 में तैयार की और इसमें कहा गया कि देश में इस कानून को लागू करने की आवश्यकता नहीं है।

इसके अलावा, भाजपा ने अपने मुख्य तीन आदर्शों में समान नागरिक संहिता को शामिल किया है। इसके अंतर्गत, पहला आदर्श था जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को हटाना, फिर दूसरा आदर्श था अयोध्या में राममंदिर का निर्माण कराना, और अब भाजपा द्वारा इस कानून को लागू करने के लिए कार्य किया जा रहा है।

Uniform Civil Code (UCC) कहा पर लागू है 

केंद्र और राज्य सरकारों ने अनिवार्य रूप से यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लागू करने के संबंध में विचारधारा को कई बार बातचीत का विषय बनाया है, हालांकि इसके बावजूद, वर्तमान समय तक कोई भी कदम इस कानून के प्रति अभी तक नहीं उठाया गया है। यह आवश्यक है कि इस कानून के लागू होने के बावजूद देश के केवल गोवा राज्य में ही इसे प्रारंभ किया गया है।

गोवा राज्य में यह कानून पुर्तगाल सरकार के आने के बाद से लागू हो रहा है, और इसके साथ ही 1961 में गोवा में एक स्वतंत्र सरकार भी बनाई गई थी। इसके अलावा, डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान तैयार करते समय एक देश एक कानून (UCC) की बात की थी, लेकिन फिलहाल यह कानून स्वैच्छिक रूप से लागू किया जाना चाहिए, इसे इस समय तक अधिग्रहण नहीं किया गया है। इस तरह से, अनुच्छेद 35 को संविधान के अनुच्छेद 44 के रूप में जोड़ दिया गया, जिसमें राज्य नीति के दिशानिर्देशों का एक हिस्सा है, विशेष रूप से भाग 4 में।

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) में शामिल सब्जेक्ट

  • विवाह
  • गोद लेना तथा तलाक
  • व्यक्तिगत स्तर
  • संपत्ति का अधिकार प्राप्त करना तथा संचालन करना

एक देश एक कानून (UCC) किन देशो में लागू है 

  • मलेशिया
  • तुर्की
  • सूडान
  • अमेरिका
  • पाकिस्तान
  • इंडोनेशिया
  • आयरलैंड
  • बांग्लादेश
  • इजिप्ट आदि

देश में UCC कानून की आवश्यकता क्यों है

सरकार ने अलग-अलग धर्मों के लिए विभिन्न कानून बनाए हैं, जिसके कारण न्यायपालिका को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। समान नागरिक संहिता के प्रारंभ होने से न्यायपालिका को भी देशभर में सभी प्रकार की समस्याओं से राहत मिलेगी, और वर्षों से अदालतों में लंबित मामलों के निर्णय भी जल्दी हो सकेंगे।

इसके अतिरिक्त, समान नागरिक संहिता के आरंभ से देश में विवाह, तलाक, गोद लेना, और जायदाद के बंटवारे जैसे मामलों में सभी के लिए एक ही कानून होगा। वर्तमान में देश के सभी धर्मों के नागरिक अपने व्यक्तिगत कानूनों के माध्यम से अपने मामलों का निपटान करते हैं, और एक समान कानून के आने से भारत में एकता बढ़ेगी, इससे किसी भी दिशा में विवाद नहीं होगा।

इसके साथ ही, समान नागरिक संहिता (UCC) से देश का विकास गति पकड़ सकता है, और यह देश की राजनीति पर भी प्रभाव डाल सकता है। इसके साथ ही, देश में वोट बैंक वाली राजनीति को भी रोकने में मदद मिलेगी और वोटों का ध्रुवीकरण भी नहीं होगा।

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के लाभ

  • यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के माध्यम से देश में सभी धर्म और जाति के नागरिकों को लैंगिक समानता का अधिकार प्राप्त होगा।
  • भारत देश के कानून के माध्यम से देश के सभी जाति और धर्म के सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हो सकेगा।
  • इसके साथ ही देश की सभी महिलाओं की आर्थिक स्थिति में भी इस कानून के माध्यम से सुधार हो सकेगा, क्योंकि देश के कुछ धर्मों के पर्सनल लॉ में महिलाओं के अधिकारों को कुछ कम रखा गया है।
  • अपने पिता की संपत्ति पर अधिकार, गोद लेने जैसे मामलों में भी एक समान नियम सभी महिलाओं के लिए लागू हो सकेंगे, इसके साथ ही पिता की संम्पत्ति पर बेटी को भी समान अधिकार प्राप्त हो सकेगा।
  • इसके अतिरिक्त यह भी देखा जाता है कि मुस्लिम धर्म की बेटियों की शादी कम उम्र में की जाती है, इस कानून से इस पर भी रोक लगेगी।
  • एक देश एक कानून (UCC) लागू होने से देश के सभी समुदाय के नागरिकों की जनता को समान अधिकार प्रदान किए जाएंगे।
  • राज्य सरकार को इस कानून को समान रूप से नागरिकों को पर लागू करने की जिम्मेदारी प्रदान की गई है, इसके माध्यम से सभी धर्म, जाति, वर्ग के नागरिकों के अधिकार के हनन होने से भी रोक लगेगी।
  • धर्म, जाति या रंग रूप में जिन भी नागरिकों के साथ भेदभाव होता है, इस कानून के माध्यम से उस भेदभाव पर भी रोक लगेगी।
  • इसके द्वारा कानूनों को सरल बनाने का कार्य किया जाएगा, जो वर्तमान में धार्मिक मान्यताओं जैसे हिंदू कोड बिल, शरीयत कानून अन्य आधार पर भिन्न भिन्न है।
  • भारत में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मुस्लिम समुदाय के लिए मौजूद है, मुस्लिम लॉ के मुताबिक पुरुष अपनी मर्जी से सिर्फ तीन बार में तलाक कहकर अपनी पत्नी को तलाक दे सकता है।
  • इसके अतिरिक्त तलाक के अन्य तरीके भी मुस्लिम लॉ में दिए गए है, जिस वजह से महिलाओं को बहुत सी परेशानी का सामना करना पड़ता है, इस कानून के अंतर्गत केवल क ही प्रकार के तहत तलाक की जाएगी।
  • देश की सभी महिलाओं को Uniform Civil Code (UCC) के माध्यम से भारत में सरकार द्वारा समान अधिकार प्रदान किए जाएंगे।

धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर संवैधानिक प्रावधान

भारतीय संविधान के आर्टिकल 25 से 28 में दिए गए मौलिक अधिकारों के माध्यम से देश के नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है, और यही समान नागरिक संहिता में शामिल किया गया है।

इसका मतलब है कि देश में निवास करने वाले सभी धर्मों के नागरिकों को उनके धर्मिक स्वतंत्रता के अधिकार हैं, और वे अपने धर्म का प्रचार-प्रसार करने में स्वतंत्र हैं।

यह समान नागरिक संहिता के माध्यम से हर नागरिक को उनके धर्म के अनुसार स्वतंत्र रहने का अधिकार देता है, जिससे सभी धर्मों के प्रतिष्ठान को बढ़ावा दिया जा सकता है।

इसके साथ ही, यह भी मान्यता प्राप्त करता है कि किसी भी नागरिक द्वारा किसी अन्य व्यक्ति के धर्म के खिलाफ कुछ भी बोलने या करने का कोई प्रतिबंध नहीं है।

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